छत्तीसगढ़ी भाषा संघर्ष समिति ने राज्यपाल और सीएम से मिलने मांगी अनुमति

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रायपुर| पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से छत्तीसगढ़ी भाषा में एम.ए. कर चुके और वर्तमान में अध्ययनरत विद्यार्थियों का प्रतिनिधिमंडल आज राज्यपाल अनुसुइया उईके एवं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिलने के लिए उनके निवास जाकर आवेदन दिया। ज्ञात हो कि राज्य बनने के 7 साल बाद प्रदेश की स्थानीय भाषा छत्तीसगढ़ी को तात्कालीन भाजपा सरकार ने 2007 में राजभाषा का दर्जा दिया था और आज 21 साल बीत गए हैं|

 

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राजभाषा छत्तीसगढ़ी मात्र राजभाषा के रूप में जानी जाती है ना ही उसको सरकारी कार्यालयों में उपयोग किया जाता है और ना ही स्कूलों में पढ़ाई का माध्यम बनाया गया है। आज भी छत्तीसगढ़ी भाषा उपेक्षा की शिकार है इन सब बातों को राज्यपाल और मुख्यमंत्री के सम्मुख रखने के लिए समिति के सदस्य आज उनके निवास कार्यालय आवेदन देने पहुंचे थे। कार्यालय ने उनका आवेदन स्वीकार किया है और जल्द ही मुलाकात करवाने का आश्वासन दिया है। इस दौरान ऋतुराज साहू, संजीव साहू, दीपमाला शर्मा, बलदेव साहू, विनय बघेल, गुलशन वर्मा, हलधर पटेल एवं रोहित पटेल उपस्थित थे।

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