गोदिकृत गांवों में शिक्षा के प्रति जागरूकता के लिए  प्रभावी कार्य करने के निर्देश

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अध्यापन और शोध कार्यों में निजी विश्वविद्यालय की महत्वपूर्ण भूमिका: डॉ. मिश्र

नियामक आयोग द्वारा निजी विश्वविद्यालयों के काम-काज और प्रगति की समीक्षा

रायपुर| छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग द्वारा आज रायपुर के नवीन विश्राम गृह में छत्तीसगढ़ में स्थापित निजी विश्वविद्यालयों की कार्य पद्धति, कार्य प्रगति, कार्ययोजना की समीक्षा की गई। बैठक में आयोग के अध्यक्ष डॉ. उमेश कुमार मिश्र ने कहा कि निजी विश्वविद्याय अध्यापन के साथ-साथ शोध के कार्यों पर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि सभी निजी विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ को लागू कर उसका क्रियान्वयन किया जाए। प्रत्येक निजी विश्वविद्यालयों द्वारा जिन 03 आदिवासी और सामान्य गांव को गोद लिया गया है, वहां किए जा रहे कार्यों के प्रभाव दिखना चाहिए। बैठक में आयोग के प्रशासनिक सदस्य श्री बृजेश चन्द मिश्र, सदस्य डॉ. श्रीमती सरिता सिन्हा, सदस्य डॉ. सुरेन्द्र सिंह खनुजा, प्रोग्रामर श्री रामजी द्विवेदी सहित निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, रजिस्टार और आयोग के अधिकारी उपस्थित थे।

 

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आयोग के अध्यक्ष डॉ. उमेश मिश्र ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में शिक्षा गुणवत्तापूर्ण होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किताबी ज्ञान के साथ छात्रों को प्रायोगिक शिक्षा और व्यवहारिक ज्ञान भी दिया जाना चाहिए। आयोग के अध्यक्ष ने बैठक में निर्देश दिया गया कि विश्वविद्यालय के शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं कर्मचारियों में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन पर जागरूकता लाने एवं उनके संरक्षण हेतु विश्वविद्यालय स्तर पर टास्क फोर्स का गठन किया जाए। आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए।  राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) द्वारा विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालयों के प्रत्यायन (।बबतमकपजंजपवद) एवं ग्रेडिंग, रैंकिंग की स्थिति के लिए प्रयास किया जाए। निजी विश्वविद्यालय यह प्रयास करें कि अध्ययनरत विद्यार्थी को उत्तीर्ण होने के बाद औद्योगिक संस्थानों में रोजगार मिले। इसके लिए औद्योगिक संस्थानों से निजी विश्वविद्यालय अनुबंध कर सकते हैं। निजी विश्वविद्यालय पाठ्यक्रम उत्तीर्ण विद्यार्थियों के रोजगार हेतु प्लेसमेंट कैम्प की जानकारी आयोग को दें।

 

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निजी विश्वविद्यालयों में दिव्यांग विद्यार्थियों की सुविधा के लिए रैम्प एवं यथोचित शौचालय की व्यवस्था की जाए। छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं के साथ सुरक्षा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। विश्वविद्यालय वेबसाइट में अधिनियम, परिनियम अध्यादेशों तथा पाठ्यक्रमों, शुल्क, प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश हेतु अंतिम तिथि और परीक्षा पद्धति की उपलब्धता को अद्यतन करते रहें। जल-जीवन मिशन के संबंध में जागरूकता का कार्य करना भी जरूरी है। शारीरिक स्वस्थता के अंतर्गत योग और साईकिलिंग तथा अन्य व्यायाम नियमित रूप से कराए जाएं। आर्गेनिक फार्मिंग के संबंध में जनजागरूकता लाई जाए इसके लिए बच्चों को आर्गेनिक फूड के उपयोग से होने वाले लाभ की जानकारी दी जाए।
आयोग के प्रशासनिक सदस्य श्री बृजेश चन्द मिश्र ने कहा कि सभी विश्वविद्यालय शिक्षा के मंदिर है, यहां अध्यापन ठीक होगा तो वहां के बच्चे देश-दुनिया में नाम कमाएंगे। उन्होंने कहा कि आयोग की कोशिश है कि सभी निजी विश्वविद्यालयों की समस्याओं का तुरंत निराकरण हो। निजी विश्वविद्यालय अकादमी न्यूनतम अर्हता के साथ सभी पदों को भरें और स्वीकृत नियमों का पालन करें। श्री मिश्र ने कहा कि आयोग का निरीक्षण औपचारिक नहीं होगा, इसलिए विश्वविद्यालयों का संचालन नियम, परिनियम के तहत करें। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में कुलपति, रजिस्टार और वित्त अधिकारी के पद रिक्त नहीं रहने चाहिए। शिक्षण उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा के साथ ही कौशल विकास और अन्य कैरिकुलम पर गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया जाए। सूचना का अधिकार के तहत जनसूचना अधिकारी के साथ अपीलीय अधिकारी की भी नियुक्ति कर ली जाए।

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