राष्ट्रीय शिक्षा नीति : एक वार्षिक पद्धति से होने वाली परीक्षाए बंद, सेमेस्टर पद्धति से होगी परीक्षा

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रायपुरराष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर मसौदा लगभग तैयार हो चुका है। कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उच्च स्तर पर मंजूरी मिलने के साथ ही इससे जुड़े बिंदु और दिशा-निर्देशों को सार्वजनिक कर दिया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक वार्षिक पद्धति से होने वाली परीक्षाओं को बंद कर उसके स्थान पर सेमेस्टर पद्धति से परीक्षा कराया जाना है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह व्यवस्था केवल नियमित छात्रों के लिए ना होकर प्राइवेट छात्रों के लिए भी होगी, अर्थात प्राइवेट परीक्षा दिलाने वाले छात्रों को भी साल में दो बार परीक्षा दिलानी होगी।

वार्षिक परीक्षा पद्धति को पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। किसी भी स्तर पर वार्षिक पद्धति से परीक्षा नहीं होगी। शैक्षणिक सत्र 2024-25 से ही नया नियम लागू कर दिया जाएगा। गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू किए जाने की घोषणा के बाद उच्च शिक्षा विभाग द्वारा सिलेबस तथा अन्य नियमों के निर्धारण के लिए पृथक-पृथक कमेटियां बनाई गई थी। इन कमेटियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मसौदों के अनुरूप छग के संदर्भ में प्रस्ताव तैयार करने निर्देश दिए गए थे।

यह आखिरी बैच

शैक्षणिक सत्र 2023-24 में जिन प्राइवेट छात्रों ने परीक्षा दिलाई है. उनकी आगे की परीक्षाएं भी वार्षिक पद्धति से ही होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति संबंधित प्र्त्येक नियम सत्र 2024 -25 में केवल प्रथम वर्ष के छात्रों पर लागू होगी। जैसे-जैसे यह बैच आगे बढ़ता जाएगा, वैसे-वैसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति क्रमशः द्वितीय और तृतीय वर्ष में लागू होगी। इस तरह से आगे आने वाले दो वर्षों तक विश्वविद्यालयों को सेमेस्टर और वार्षिक दोनों ही पद्धतियों से परीक्षाएं लेनी होगी। महाविद्यालयों में भी आने वाले दो सत्रों तक वार्षिक और सेमेस्टर दोनों पद्धति से कक्षाएं संचालित होंगी।

प्राइवेट छात्रों को भी सर्टिफिकेट और डिप्लोमा

नियमित छात्रों को बीच में पढ़ाई छोड़े जाने की स्थिति में उनकी अध्ययन अवधि के आधार पर सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री देने का प्रावधान राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किया गया है। बड़ी संख्या में ऐसे प्राइवेट छात्र होते हैं, जो एक-दो वर्षों की परीक्षा दिलाकर पढ़ाई छोड़ देते हैं। ऐसे में प्राइवेट छात्रों को भी उनकी अध्ययन अवधि के आधार पर सर्टिफिकेट, डिप्लोमा तथा डिग्री देने के संबंध में विचार किया जा रहा है।

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