पशुपालन से सुकृता की बदली तस्वीर : पशुपालन से प्रतिमाह 10 से 12 हजार तक की हो रही, आमदनी मनरेगा बना सहारा

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रायपुर : महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से ग्रामीणों की आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में जिले में लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जांजगीर-चांपा जिले के नवागढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम धुरकोट की निवासी श्रीमती सुकृता बाई कश्यप के जीवन में योजना ने सकारात्मक बदलाव लाया है।

मनरेगा के तहत उनके मवेशियों के लिए लगभग 72 हजार रुपये की लागत से एक आधुनिक शेड का निर्माण कराया गया। पहले सुकृता अपने पशुओं को खुले में रखती थीं, जिससे बारिश और बदलते मौसम में उनके बीमार होने का खतरा बना रहता था। शेड निर्माण के बाद अब पशुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण मिल रहा है, जिससे उनकी देखभाल आसान हुई है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि हुई है।

वर्तमान में सुकृता के पास कई गाय और बछड़े हैं, जिनका वे व्यवस्थित रूप से पालन कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पहले उचित व्यवस्था के अभाव में काफी परेशानियां होती थीं, लेकिन अब शेड बनने से बड़ी राहत मिली है। पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग वे जैविक खाद बनाने में कर रही हैं, जिससे उनके खेतों की उर्वरता और फसल उत्पादन में भी सुधार हुआ है।

पशुपालन से उन्हें प्रतिमाह 10 से 12 हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। वहीं, शेड निर्माण के दौरान स्थानीय मनरेगा मजदूरों को भी रोजगार मिला, जिससे योजना के रोजगार सृजन और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के उद्देश्य की प्रभावी पूर्ति हुई है।

ग्राम धुरकोट में यह पहल अन्य ग्रामीणों के लिए प्रेरणादायक बन रही है। अब गांव के लोग भी मनरेगा के तहत पशुपालन और अन्य आजीविका आधारित गतिविधियों को अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिससे गांव के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है।

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