सेवा सेतु शिविर में मिली मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल से आसान हुआ आवागमन, जरूरी कामों के लिए अब स्वयं आ-जा सकेंगी
सफुरा बाई बोलीं- पहले कहीं आने-जाने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी, अब अपने काम स्वयं कर सकूंगी
रायपुर : कभी घर से बाहर निकलने और रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए दूसरों की मदद पर निर्भर रहने वाली जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम उरैहा की श्रीमती सफुरा बाई के जीवन में अब नई उम्मीद और आत्मविश्वास आया है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत कुटराबोड़ में आयोजित सेवा सेतु शिविर में उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई। इस सहायता से उनके लिए आवागमन की कठिनाइयां कम होंगी और वे अपने जरूरी कामों के लिए स्वयं आ-जा सकेंगी।
श्रीमती सफुरा बाई के लिए मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पहले उन्हें घर से बाहर निकलने और आवश्यक कार्यों के लिए दूसरों की सहायता लेनी पड़ती थी। अब मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलने से उनकी दूसरों पर निर्भरता कम होगी और दैनिक जीवन के कार्यों को पूरा करने में अधिक सुविधा मिलेगी।
“अब अपने जरूरी कामों के लिए स्वयं आ-जा सकूंगी”
मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलने पर श्रीमती सफुरा बाई के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दी। उन्होंने बताया कि पहले कहीं आने-जाने के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। कई बार छोटे-छोटे जरूरी कामों के लिए भी किसी के सहयोग की आवश्यकता होती थी। अब मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल मिलने से वे अपने कामों के लिए स्वयं आ-जा सकेंगी। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और दैनिक जीवन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
श्रीमती सफुरा बाई ने इस सहायता के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।
सुविधा के साथ मिला आत्मसम्मान और आत्मविश्वास
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित सेवा सेतु शिविरों के माध्यम से जरूरतमंद नागरिकों तक शासकीय योजनाओं और सहायता का लाभ पहुंचाया जा रहा है। दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की पहल उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाने के साथ सामाजिक सहभागिता और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा दे रही है।
श्रीमती सफुरा बाई की यह ‘सेवा की कहानी’ दर्शाती है कि जरूरत के अनुरूप मिलने वाली एक सहायता किसी व्यक्ति के जीवन में कितना महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती है। मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल ने उनके लिए न केवल आवागमन की राह आसान की है, बल्कि अपने काम स्वयं करने का भरोसा और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का नया संबल भी दिया है।
