‘बिहान’ से बदली हजारों महिलाओं की तकदीर, आत्मनिर्भर बन रहीं ‘लखपति दीदी’

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ऑटो रिक्शा और किराना व्यवसाय से सूरजपति बनीं आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल

रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से प्रदेशभर में ग्रामीण महिलाओं के जीवन में व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

इसी कड़ी में सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड अंतर्गत ग्राम तारागी की निवासी श्रीमती सूरजपति की कहानी अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभरी है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सूरजपति आज वर्षिक लगभग 1.80 लाख रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं।

संघर्ष से सफलता तक का सफर

श्रीमती सूरजपति बताती हैं कि पहले उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। वर्ष 2020 में ‘बिहान’ योजना से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत हुई। स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन प्राप्त हुआ, जिसने उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया।

ऋण सहायता से शुरू किया व्यवसाय

समूह के माध्यम से प्राप्त 60 हजार रुपये के ऋण का उपयोग उन्होंने सोच-समझकर किया और ऑटो रिक्शा संचालन के साथ-साथ किराना दुकान का व्यवसाय शुरू किया। उनके इस निर्णय ने उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूती प्रदान की।

दोहरी आय से मजबूत हुई आर्थिक स्थिति

वर्तमान में सूरजपति अपने दोनों व्यवसायों से प्रतिदिन लगभग 500 रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। किराना दुकान से लगभग 200 रुपये तथा ऑटो रिक्शा से लगभग 300 रुपये प्रतिदिन की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनकी वार्षिक आय लगभग 1.80 लाख रुपये तक पहुंच गई है।

आत्मनिर्भरता से बढ़ा आत्मविश्वास

आज सूरजपति न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण बेहतर ढंग से कर रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। उनके जीवन स्तर में सुधार और बढ़े आत्मविश्वास ने यह सिद्ध कर दिया है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) एवं ‘बिहान’ जैसी योजनाएं प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दे रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहयोग, प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रभावी कार्य किया जा रहा है।

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