महाकाल की नगरी में उमड़े श्रद्धालु, शिप्रा नदी में डुबकी लगाकर किया दीपदान

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उज्जैन : मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी में जहां एक ओर कालों के काल महाकाल का पवित्र स्थान है. वहीं महाकाल मंदिर के पास शिप्रा का पवित्र जल है. इसी पवित्र शिप्रा नदी के घाटों पर दीपदान करने का बड़ा महत्व माना जाता है.

उज्जैन पहुंचे देश भर से श्रद्धालु 

उज्जैन में हमेशा से देश भर में आस्था का केंद्र रहा है. बाबा महाकाल के दर्शन के लिए देश और विदेश से श्रद्धालु आते हैं. यहां आने वाले श्रद्धालु पवित्र शिप्रा नदी में डुबकी लगाते हैं. शुक्रवार यानी 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार मनाया गया. हिंदू कैलेंडर के कार्तिक महीने की पूर्णिमा को ये त्योहार मनाया जाता है. इसी विशेष अवसर पर देश भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचे. यहां बाबा महाकाल के दर्शन किए और पवित्र शिप्रा नदी में डुबकी लगाई.

पवित्र डुबकी और दीपदान का विशेष महत्व

कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शिप्रा नदी में स्नान करने और दीपदान करने का विशेष महत्व है. शिप्रा नदी में डुबकी लगाने आए हजारों श्रद्धालुओं ने दीपदान भी किया. पूर्णिमा की रात में दीपक शिप्रा नदी में तारों की तरह चमकते नजर आ रहे थे. मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि समुद्र मंथन के बाद अमृत कलश जब ले जाया जा रहा था तो इससे कुछ बूंदें पृथ्वी पर गिरीं. अमृत के ये बूंदें जिन स्थानों पर गिरीं उनमें से एक शिप्रा नदी भी है.

शिप्रा नदी में अमृत की बूंद गिरने के कारण हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि शिप्रा नदी का नाम लेने मात्र से सारी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

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