कुदरगढ़ महोत्सव 2026 का भव्य शुभारंभ — भक्ति, लोक संस्कृति और उल्लास से गूंजा कुदरगढ़ धाम

Featured Latest आसपास छत्तीसगढ़ प्रदेश

सूरजपुर : चैत्र नवरात्र के शुक्ल पंचमी की दिव्य बेला में आस्था, संस्कृति और उत्साह का अद्भुत संगम आज कुदरगढ़ धाम में देखने को मिला, जब जिला प्रशासन व मां कुदरगढ़ी न्याय ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान से कुदरगढ़ महोत्सव 2026 का भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। 23 से 25 मार्च तक आयोजित इस त्रि-दिवसीय महोत्सव ने पहले ही दिन श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक वैभव से पूरे क्षेत्र को सराबोर कर दिया।

शुभारंभ अवसर पर लोक न्याय ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राम सेवक पैंकरा ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए महोत्सव के उद्देश्य और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कुदरगढ़ महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि यह इस क्षेत्र की लोक परंपराओं, जनआस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने का एक सार्थक प्रयास है। श्री पैंकरा ने माँ कुदरगढ़ी की कृपा से इस महोत्सव को प्रतिवर्ष और भव्य रूप देने का संकल्प व्यक्त करते हुए सभी श्रद्धालुओं एवं दर्शकों का हार्दिक स्वागत किया।

महोत्सव के प्रथम दिवस पर जिले के पाँच करमा दलों ने पारंपरिक नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत कर दिया। सुप्रसिद्ध कलाकार आनंदिता तिवारी ने कथक नृत्य के माध्यम से माँ कुदरगढ़ी की भावपूर्ण स्तुति प्रस्तुत कर दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय सहित अन्य शैक्षणिक संस्थानों के छात्र-छात्राओं ने भी रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया।
भक्ति रस की प्रस्तुतियों में निलेश मित्तल के भजनों और स्तुति जायसवाल के धार्मिक गीतों ने श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो दिया। पंडित लल्लू राजा एवं उनके साथियों द्वारा सरगुजिहा लोकगीतों की सुमधुर प्रस्तुति ने लोक संस्कृति की मिठास बिखेर दी। महोत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में मुंबई के सुप्रसिद्ध लीला रॉक बैंड की भक्तिमय प्रस्तुति ने आधुनिकता और परंपरा का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। रात्रि भक्ति एवं सांस्कृतिक संध्या ने वातावरण को और भी अलौकिक बना दिया तथा दर्शक देर रात तक कार्यक्रमों में रमे रहे।
जिला प्रशासन का उद्देश्य इस आयोजन के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को राज्य स्तर पर स्थापित करना और स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। लोक न्याय ट्रस्ट की सहभागिता ने इस आयोजन को केवल उत्सव नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना दिया है।

महोत्सव के दूसरे दिन 24 मार्च को सांस्कृतिक रंग और गहरे होने वाले हैं। छात्र-छात्राओं द्वारा करमा नृत्य एवं विविध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ नेहा तिवारी के लोक जस गीत, बसंत वैष्णव की प्रस्तुति, कला केंद्र सूरजपुर के कलाकारों द्वारा नृत्य एवं गायन, बीजीएम ग्रुप की बैंड प्रस्तुति, लक्ष्मीकांत जडेजा, आसमी शर्मा के सांस्कृतिक गीत, कमलेश शर्मा, नासिर खान एवं संजय सुरीला की मनमोहक प्रस्तुतियाँ महोत्सव को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगी।

स्थानीय और क्षेत्रीय कलाकारों की सहभागिता, लोक संस्कृति की सजीव झलक और भक्ति की अनुगूंज ने कुदरगढ़ महोत्सव को एक विशिष्ट पहचान और गरिमा दी है। नवरात्रि के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ इस आयोजन की लोकप्रियता और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करती है। माँ कुदरगढ़ी के चरणों में यह तीन दिवसीय महोत्सव जिले की सामूहिक आस्था, संस्कृति और जन-चेतना का जीवंत उत्सव बन गया है।

लोगों को शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *