प्रेम संबंध बना मौत की वजह, पत्नी ने रची हत्या की साजिश, दो साल बाद नाले से मिला कंकाल

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दंतेवाड़ा : दंतेवाड़ा की वह रात बिल्कुल सामान्य थी. शहर सो रहा था, सड़कों पर सन्नाटा पसरा था और किसी को अंदाजा भी नहीं था कि एक घर के भीतर मौत की ऐसी साजिश रची जा चुकी है, जिसका राज पूरे दो साल तक मिट्टी के नीचे दफन रहेगा. रामदई कश्यप नाम की महिला अचानक गायब हो गई थी. परिवार ने उसकी तलाश की, रिश्तेदारों से पूछताछ की, गांवों तक खबर पहुंचाई, लेकिन रामदई जैसे हवा में गायब हो गई. वक्त गुजरता गया और उसके साथ गुमशुदगी की फाइल पर भी धीरे-धीरे धूल जमने लगी.

गुमशुदगी से हत्या तक पहुंची जांच

लेकिन पुलिस को कहीं न कहीं यह एहसास था कि मामला सिर्फ गुमशुदगी का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश का है. दो साल बाद जब दंतेवाड़ा पुलिस ने पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलीं, तब एक नाम बार-बार सामने आने लगा- कॉल डिटेल्स ने पुलिस को रिश्तों की उस दुनिया तक पहुंचा दिया, जहां प्यार धीरे-धीरे शक में बदल चुका था.

जांच में खुलासा हुआ कि रामदई और पाण्डू के बीच नजदीकियां थीं. यह बात पाण्डू की पत्नी कमली करटम को नागवार गुजरती थी. बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता रहा, लेकिन भीतर ही भीतर कमली के मन में गुस्सा और जलन सुलग रही थी. फिर एक दिन उसने ऐसा फैसला लिया, जिसने एक महिला की जिंदगी हमेशा के लिए खत्म कर दी.

हत्या की साजिश ऐसे रची गई

पुलिस के मुताबिक, कमली ने अपने रिश्तेदार हुंगाराम उर्फ बुटू करटम को पैसे देकर हत्या की सुपारी दी. योजना बेहद शातिर तरीके से तैयार की गई थी. पहले अपने पति की पहली पत्नी की बेटी लक्ष्मी को दंतेवाड़ा भेजा गया, ताकि रामदई की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके. उस रात कमली ने फोन कर पूछा- ‘रामदई घर में है ना…?’ उधर से जवाब मिला- ‘हां… वह सो रही है…’ बस, यहीं से शुरू हुआ मौत का वह खेल, जिसका अंत एक प्लास्टिक की बोरी में होना था. देर रात हुंगाराम घर में दाखिल हुआ. सो रही रामदई को संभलने का मौका तक नहीं मिला. उसका मुंह और गला दबाया गया और कुछ ही मिनटों में उसकी सांसें थम गईं.

प्लास्टिक की बोरी में भरकर नाले में दफनाया शव

कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. आधी रात के बाद शव को सफेद प्लास्टिक की बोरी में भरा गया. फिर पिकअप वाहन से उसे गांव तोयलंका ले जाया गया. गांव के पीछे बहने वाले नाले के किनारे गड्ढा खोदा गया और रामदई को हमेशा के लिए मिट्टी में दफना दिया गया. आरोपियों को लगा था कि यह राज कभी बाहर नहीं आएगा. लेकिन कहते हैं, कत्ल कितना भी शातिराना क्यों न हो, कोई न कोई सुराग पीछे छोड़ ही जाता है.

दो साल बाद ऐसे खुला राज

दो साल बाद पुलिस उसी नाले तक पहुंच गई. दंडाधिकारी, फोरेंसिक टीम और पुलिस की मौजूदगी में खुदाई शुरू हुई. कुछ देर बाद मिट्टी के नीचे से सफेद प्लास्टिक की बोरी दिखाई दी. बोरी खोली गई तो उसके भीतर मानव कंकाल मिला. वह रामदई थी, जिसे दो साल पहले मौत के घाट उतारकर दफना दिया गया था.

आरोपियों से जारी है पूछताछ

अब पुलिस ने कमली करटम और लक्ष्मी नाग को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. वहीं, इस सनसनीखेज हत्याकांड में शामिल बाकी आरोपियों की भूमिका को लेकर पूछताछ जारी है. दंतेवाड़ा में यह मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि रिश्तों में पनपे शक, जलन और साजिश की ऐसी कहानी बन चुका है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है.

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