आरक्षण केंद्र में रेल टिकटों का बड़ा खेल… छत्तीसगढ़ से उत्तर प्रदेश जा रही थी तत्काल टिकट… पीआरएफ स्टॉफ गिरफ्तार

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रायपुर/अंबिकापुर. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की जांच में रेलवे आरक्षित टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है. जांच में सीटी पीआरएस बैकुंठपुर में कार्यरत नगर पालिका के संविदा कर्मचारी और उत्तर प्रदेश निवासी एक व्यक्ति की संलिप्तता सामने आने के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया. आरोपियों के मोबाइल से 60 तत्काल व सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों के स्क्रीनशॉट बरामद किए गए हैं, जिनकी कुल कीमत 3 लाख 68 हजार 351 रुपए बताई गई है.

वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, बिलासपुर के निर्देश पर अंबिकापुर आरपीएफ निरीक्षक सुनीता मिंज ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान सामने आया कि 1 अगस्त 2026 को सीटी पीआरएस बैकुंठपुर के काउंटर से खाली टिकट पर पेन से पीएनआर नंबर सहित अन्य जानकारी हाथ से लिखी गई थी. यह टिकट इलाहाबाद जंक्शन में जांच के दौरान पकड़ा गया. सिस्टम में संबंधित पीएनआर नंबर की जांच करने पर वह गलत पाया गया.

इस संबंध में जीआरपी जौनपुर में टिकट जब्त कर 5 अगस्त 2026 को अपराध क्रमांक 22/26 के तहत बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) में मामला दर्ज किया गया था.

संविदा कर्मचारी की भूमिका सामने आई

जांच आगे बढ़ने पर पता चला कि उक्त टिकट सीटी पीआरएस बैकुंठपुर में कार्यरत नगर पालिका के संविदा कर्मचारी अविनाश कुमार, पिता शंभू सिंह, उम्र 35 वर्ष, निवासी नवापारा सरडी, थाना चरचा, जिला कोरिया द्वारा तैयार किया गया था. आरोप है कि वह खाली टिकट पर हाथ से पीएनआर व अन्य जानकारी लिखकर टिकट तैयार करता था.

जांच में उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के पिरखापुर निवासी संजय कुमार विश्वकर्मा, उम्र 48 वर्ष, की भी भूमिका सामने आई. आरोप है कि अविनाश कुमार उससे टिकटों की अवैध खरीद-बिक्री करता था और संजय कुमार इन्हें ग्राहकों को अधिक कीमत पर बेचता था.

प्रति यात्री कमीशन और मुनाफा

जांच के दौरान अविनाश कुमार ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वह टिकट तैयार कर बस के माध्यम से संजय कुमार को बनारस भेजता था. इसके बदले उसे प्रति व्यक्ति 400 रुपये कमीशन मिलता था. वहीं संजय कुमार ने पूछताछ में बताया कि वह बनारस में टिकट प्राप्त कर अलग-अलग ग्राहकों को देता था और प्रत्येक यात्री पर करीब 600 से 800 रुपये का लाभ कमाता था.

 मोबाइल चैट से सामने आया बड़ा नेटवर्क

जांच के दौरान संजय कुमार के मोबाइल फोन की जांच में व्हाट्सऐप चैट से 60 तत्काल और सामान्य रेलवे आरक्षित टिकटों की जानकारी सामने आई. इनमें 14 टिकट ऐसे थे, जिन पर हाथ से पीएनआर नंबर और अन्य जानकारी लिखी गई थी. ये जानकारी अविनाश कुमार के मोबाइल से भेजी गई थी.

पूछताछ में अविनाश कुमार ने कथित तौर पर पीआरएस काउंटर से तत्काल टिकट बनाने और 14 टिकट हाथ से लिखकर संजय कुमार को देने की बात स्वीकार की. दोनों से रेलवे आरक्षित टिकटों की खरीद-बिक्री के संबंध में वैध अधिकार पत्र मांगा गया, लेकिन वे कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके. इसके बाद दोनों द्वारा रेलवे टिकटों को अतिरिक्त राशि लेकर बेचने की बात स्वीकार किए जाने की जानकारी जांच में सामने आई.

3.68 लाख रुपए के टिकटों की जानकारी जब्त

आरपीएफ ने आरोपियों के मोबाइल फोन से 60 तत्काल रेलवे आरक्षित टिकटों के स्क्रीनशॉट निकालकर जब्त किए. इन टिकटों की कुल कीमत 3,68,351 रुपये बताई गई है. मामले में रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. आरपीएफ द्वारा अपराध क्रमांक 727/26, दिनांक 16 अगस्त 2026 को धारा 143 रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया.

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