नैनो उर्वरकों से त्रिभुवन की बढ़ी आय, सुधरी मिट्टी की सेहत : मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और गुणवत्ता को बनाए रखने सबसे प्रभावी उपाय है : कृषक त्रिभुवन

Featured Latest खरा-खोटी

रायपुर : आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करना आज के समय में टिकाऊ खेती की ओर एक बड़ा कदम है। इसका एक बेहतरीन उदाहरण दुर्ग जिले के ग्राम महमरा के प्रगतिशील किसान श्री त्रिभुवन ने पेश किया है, जो आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक नई मिसाल बन गए हैं। उन्होंने अपनी फसलों में नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया है।

भारी-भरकम उर्वरक लागत में आई बड़ी कमी

इस नवाचार के फलस्वरूप उन्होंने पारंपरिक रूप से होने वाली भारी-भरकम उर्वरक लागत में बड़ी कमी लाई है, साथ ही अपनी खेती को पहले से कहीं अधिक लाभकारी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। अपने अनुभवों को साझा करते हुए श्री त्रिभुवन का बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से उनकी फसलों की वृद्धि बहुत बेहतर और तेजी से हुई है।

कम मात्रा में छिड़काव और परिणाम अधिक प्रभावी

त्रिभुवन ने महसूस किया कि पारंपरिक बोरा बंद उर्वरकों की तुलना में बेहद कम मात्रा में छिड़काव करने के बावजूद इसके परिणाम कहीं अधिक प्रभावी और संतोषजनक प्राप्त हुए हैं। इस तकनीक के कारण उनकी कृषि लागत में भारी बचत हुई है, जिससे सीधे तौर पर उनकी आर्थिक स्थिति को एक नई मजबूती मिली है। कम खर्च में अधिक मुनाफा कमाने की उनकी यह कला अब आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

आने वाली पीढ़ियों के लिए भूमि को सुरक्षित, स्वस्थ, उपजाऊ बनाएगी

श्री त्रिभुवन का दृढ़ विश्वास है कि नैनो उर्वरक केवल वर्तमान समय में फसल का उत्पादन बढ़ाने का एक शॉर्टकट माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह लंबे समय तक मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता और उसकी गुणवत्ता को अक्षुण्ण बनाए रखने का भी एक सबसे प्रभावी उपाय हैं। रासायनिक खादों के अत्यधिक उपयोग से बंजर होती धरती को बचाने के लिए उनकी यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए कृषि भूमि को पूरी तरह सुरक्षित, स्वस्थ और उपजाऊ बनाए रखने की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और अनुकरणीय प्रयास है।

लोगों को शेयर करें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *