पेड़ों की छांव में उतरा सुशासन: डीपाडीह शिविर में समाधान, संवाद और विश्वास का संगम

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स्थानीय बोली में योजनाओं के प्रचार-प्रसार से ग्रामीणों तक पहुंचेगा लाभ — सांसद श्री चिंतामणि महाराज

रायपुर : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के सुशासन संकल्प को साकार करते हुए प्रदेश में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविरों की श्रृंखला अब दूरस्थ अंचलों में प्रभावी परिणाम दे रही है। इसी क्रम में बलरामपुर जिले के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक स्थल डीपाडीह में आम के पेड़ों की शीतल छांव तले आयोजित शिविर ने सुशासन को एक मानवीय और सहज स्वरूप प्रदान किया।

ग्राम पंचायत डीपाडीह में आयोजित इस अनूठे शिविर में ग्रामीणों ने खुलकर अपनी समस्याएं साझा कीं। प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ समस्याएं सुनीं तथा अनेक मामलों का मौके पर ही निराकरण कर दिया। शेष आवेदनों के शीघ्र समाधान का भरोसा दिलाया गया, जिससे ग्रामीणों में संतोष और विश्वास दोनों परिलक्षित हुए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरगुजा सांसद श्री चिंतामणि महाराज ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि राजस्व प्रकरणों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए तथा श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र श्रमिक तक पहुंचे। उन्होंने सभी श्रमिकों के पंजीयन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इससे उनकी सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

सांसद श्री महाराज ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में संप्रेषण की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि स्थानीय बोली में योजनाओं की जानकारी देना अत्यंत आवश्यक है। इससे दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग योजनाओं को बेहतर समझ पाएंगे और उनसे सीधे जुड़ सकेंगे।

शिविर में विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहे। महिला एवं बाल विकास विभाग के स्टॉल में पौष्टिक आहार, संतुलित भोजन एवं स्थानीय उपलब्ध खाद्य सामग्री से तैयार पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया गया। महिलाओं को पोषण के प्रति जागरूक करते हुए कुपोषण मुक्ति का संदेश दिया गया।

वन विभाग द्वारा औषधीय पौधों की जानकारी दी गई, वहीं विद्युत विभाग ने बिजली बिल भुगतान और योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा की। प्रत्येक स्टॉल में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी ने इस शिविर को जनसहभागिता का सशक्त उदाहरण बना दिया।

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